ZEE जानकारी: गुजरात में जैसे-जैसे चुनाव का प्रचार आगे बढ़ा, वैसे-वैसे राजनीति की भाषा गिरती गई

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आज सबसे पहले हम देश की राजनीतिक मर्यादा का DNA टेस्ट करेंगे… जो गुजरात के चुनावों के दौरान हर रोज़ नीचे गिर रही है. 2007 में जब गुजरात के विधानसभा चुनाव होने वाले थे, तब कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने नरेन्द्र मोदी को मौत का सौदागर कहा था. उस वक्त नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे. और इस Negative बयानबाज़ी के बाद कांग्रेस ये चुनाव बहुत बुरी तरह से हार गई थी. 

गुजरात में एक बार फिर चुनाव हो रहे हैं. और नरेन्द्र मोदी अब गुजरात के मुख्यमंत्री नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री हैं. लेकिन कांग्रेस पार्टी को शायद इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता. क्योंकि कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने देश के प्रधानमंत्री के बारे में अपशब्दों का प्रयोग किया है. सबसे पहले आप ये सुनिए कि मणिशंकर अय्यर ने क्या कहा? और प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें क्या जवाब दिया. मणिशंकर अय्यर के इस बयान के बाद कांग्रेस ने उन्हें प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है. और उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है. इससे पहले राहुल गांधी ने भी एक Tweet करके Damage कंट्रोल की पूरी कोशिश की.
 
Twitter पर राहुल गांधी ने भी मणिशंकर अय्यर के बयान की निंदा की है. राहुल गांधी का कहना है कि मणिशंकर अय्यर को माफी मांगनी चाहिए. इस बीच मणिशंकर अय्यर के इन अपशब्दों पर बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने भी जवाब दिया है. उन्होंने भी एक Tweet किया है और कहा है कि कांग्रेस ने बौखला गई है.. और और अब गुजरात के वोटर.. गरीबों और दलितों का विरोध करने वाली कांग्रेस को जवाब देगी.

आपको याद होगा आज से करीब डेढ़ महीने पहले जब गुजरात चुनाव के प्रचार की शुरुआत हुई थी तो मुद्दा विकास का था. बीजेपी विकास के नाम पर वोट मांग रही थी, जबकि कांग्रेस कह रही थी कि विकास पागल हो गया है. इसके बाद GST और नोटबंदी का मुद्दा आया. लेकिन जैसे-जैसे चुनाव का प्रचार आगे बढ़ा, वैसे-वैसे राजनीति की भाषा गिरती गई और मुद्दों का स्तर भी गिरता गया. 

विकास की जगह पाटीदार वोटबैंक, आरक्षण और गुजरात की अस्मिता ने ले ली. इसके बाद औरंगज़ेब, बाबर और खिलजी के नाम पर राजनीति होने लगी. और फिर गुजरात में राम मंदिर का सवाल भी आ गया . इसके बाद मंदिर और मस्जिद के नाम पर तुष्टीकरण और ध्रुवीकरण की कोशिश की गई

और अब पहले चरण का चुनाव प्रचार खत्म होते होते… गुजरात की राजनीति नीच जैसे शब्द तक पहुंच गई है. यानी विकास से शुरू हुआ चुनाव प्रचार… नीच पर खत्म हो रहा है. आप समझ सकते हैं कि गुजरात की राजनीति का स्तर कितना नीचे गिर गया है… गुजरात में नेताओं की जो भाषा और शालीनता होनी चाहिए थी.. वो कहीं दिखाई नहीं दी… और असली मुद्दे इस शोर में कहीं खो गये. अभी तो सिर्फ पहले चरण का चुनाव प्रचार थमा है. दूसरे चरण का चुनाव प्रचार अभी बाकी है. आने वाले दिनों में राजनीतिक भाषा का स्तर और भी ज़्यादा गिर सकता है. 

विडंबना ये है कि गुजरात में कोई असली मुद्दों की बात नहीं कर रहा है और इसके लिए कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही दोषी हैं. गुजरात देश के सबसे प्रदूषित राज्यों में से एक है. इसी साल नवंबर के महीने में अहमदाबाद का Air Quality Index 300 के पार चला गया था. अहमदाबाद की हवा भी करीब करीब दिल्ली जितनी ही प्रदूषित है. 

गुजरात में बहुत से उद्योग हैं, इसलिए इन उद्योगों के कारखानों से निकलने वाला ज़हरीला धुंआ पूरे राज्य को प्रदूषित कर रहा है. आपको जानकर हैरानी होगी कि गुजरात में 7 हज़ार 751 waste generating units खतरनाक श्रेणी की हैं. जो पूरे देश का करीब 29% है. 

यानी गुजरात में प्रदूषण एक बड़ा मुद्दा है, लेकिन ये चुनावी मुद्दा नहीं है. इसके अलावा गुजरात में बार बार बाढ़ आती है. लेकिन बाढ़ भी गुजरात में चुनावी मुद्दा नहीं बन पाई. गुजरात में इस साल जून जुलाई में बाढ़ की वजह से 200 लोगों की मौत हो गई थी. असल में ये गुजरात के असली चुनावी मुद्दे होने चाहिए थे. लेकिन इनकी बात कोई नहीं कर रहा है. 

पिछले 48 घंटों में कपिल सिब्बल और मणिशंकर अय्यर ने बीजेपी की बहुत मदद कर दी है. कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद की सुनवाई के दौरान ये कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद होनी चाहिए. इससे गुजरात के लोगों में ये संदेश गया कि कांग्रेस राम मंदिर का विरोध कर रही है.. ताकि बीजेपी को इसका फायदा ना मिले. 

जबकि मणिशंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नीच कहकर…उनका अपमान किया है और गुजरात के वोटर्स को नाराज़ कर दिया. कल तक जो सर्वे आ रहे थे.. वो ये बता रहे थे कि बीजेपी को 110 के आसपास सीटें मिलनी चाहिए.. लेकिन कपिल सिब्बल और मणिशंकर अय्यर ने अपने बयानों से बीजेपी की मदद कर दी है और इससे बीजेपी को 25 सीटों का फायदा हो सकता है. इसलिए… बीजेपी के कपिल सिब्बल और मणिशंकर अय्यर को Thank you कहना चाहिए.

किसी भी देश और समाज के चरित्र का पता इस बात से चलता है कि वहां पर होने वाले चुनावों की भाषा कैसी है.. और वहां के मुद्दों का स्तर क्या हैं ?

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