shayari of Waqar Manvi– Article

0
22

Advance Call Recorder

वक़ार मानवी

News18Hindi

Updated: October 11, 2017, 3:25 PM IST

संगीत और शेर-शायरी के प्रेमियों के लिए hindi.news18.com ने कॉलम शुरू किया है. इसमें आप हर रोज़ कविताएं, शायरी, गज़लें और नज़्म सुनने का लुत्फ उठाते हैं. आज की महफ़िल-ए-मुशायरा में सुनिए और पढ़िए वक़ार मानवी के क़लाम.

देखें वीडियो और पढ़ें, क़लाम

सितम तो अपनी जान-ए-नातवां पर कम नहीं टूटा

कनालें सख़्त जानीं हैं के फिर भी दम नहीं टूटाबिखरने टूट जाने के मराहिल से भी हम गुज़रे
ये सब कुछ हुआ लेकिन ईसारे ग़म नहीं टूटा

इस्तेराब से इस क़रब से निकलने दे
संभलने दे मुझे, ऐ दर्द-ए-दिल संभलने दे

हमारे हक़ भी उजाले कर कभी तस्लीम
कभी हमारे भी घर में चराग़ जलने दे

मुझे न रोक के मंज़िल बुला रही है मुझे
मैं अपनी धुन में जिधर चल रहा हूं, चलने दे

मुझे तो अपनी तबाही पे मेरी ग़ैरत-ए-दिल
अजब नहीं कफ-ए-अफसोस भी न मलने दे

(वक़ार मानवी)



First published: October 11, 2017

Leave a Reply