Mulayam Singh Yadav meets Akhilesh Yadav, said family is united

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(फाइल फोटो)

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लखनऊ: गुरुवार को एक अर्से बाद मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव सार्वजनिक रूप से साथ-साथ दिखे. सब अचानक ही हुआ लेकिन शायद नेताजी पहले ही इसकी स्क्रिप्ट लिख चुके थे. मौका राम मनोहर लोहिया की जयंती का था लेकिन पिता ने अपने पुत्र को माफ करने का बहाना ढूंढ लिया था.

मुलायम सिंह यादव गुरुवार को सबसे पहले लोहिया ट्रस्ट पहुंचे. यहां इनके छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव पहले से मौजूद थे. दोनों ने राम मनोहर लोहिया की तस्वीर पर फूल माला पहनाया. मुलायम सिंह यादव ने ही लोहिया ट्रस्ट बनाया था. अखिलेश यादव को भी वहां आना था लेकिन वे नहीं आए. कुछ देर बाद नेताजी ने फोन पर किसी से बात की और फिर गाड़ी में बैठ कर चल दिए. वहां मौजूद सारे लोग देखते रह गए. शिवपाल सिंह यादव वहीं लोहिया ट्रस्ट में ही रुके रहे.

फिर खबर आई कि मुलायम सिंह यादव तो लोहिया पार्क पहुंच गए हैं. हर साल समाजवादी पार्टी यहां लोहिया जयंती मनाती रही है. ठीक 15 मिनट बाद अखिलेश यादव भी वहीं पहुंच गए. सभी नेता कार्यकर्ता हैरान थे, मुलायम सिंह यादव के अलावा किसी की समझ में कुछ नहीं आ रहा था.

जैसे ही अखिलेश यादव वहां पहुंचे उन्होंने पिता मुलायम सिंह यादव के पैर छुए और आशीर्वाद लिया. नेताजी ने भी हाथ बढ़ा कर अखिलेश के सिर पर हाथ रखा. वहां मौजूद सारे लोग ताली बजाने लगे. इसके साथ मीडिया के कैमरों के फ्लैश चमकने लगे. सारे लोग महीनों बाद सब ऐसा दृश्य देख रहे थे.

समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता वीडियो बनाने के लिए जब तक मोबाइल फोन जेब से निकालते, पिता और पुत्र का मिलन खत्म हो चुका था. मुलायम सिंह यादव से किसी रिपोर्टर ने पूछा – क्या सब ठीक हो गया ? तो नेताजी बोले ” ये तो आप लोग ही न जाने क्या क्या लिखते रहते हो, पूरा परिवार एक है.”

मुलायम सिंह और अखिलेश यादव में बातचीत फिर से शुरू हो गई है. इस महीने दोनों कई बार मिल चुके हैं. आगरा में समाजवादी पार्टी के सम्मेलन में अखिलेश पांच साल के लिए अध्यक्ष चुने गए. मुलायम सिंह यादव आगरा तो नहीं जा पाए लेकिन अखिलेश यादव को फोन पर आशीर्वाद दे दिया. मजबूरी में शिवपाल सिंह यादव ने भी ऐसा ही किया.

लोहिया जयंती पर पिता और पुत्र के मिलन के बाद से शिवपाल सिंह यादव और मजबूर हो गए हैं. बीजेपी ने उन्हें भाव नहीं दिया और अब बड़े भाई मुलायम सिंह यादव भी ‘मुलायम’ नहीं रहे.

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