रुला देगी ‘द फॉल्ट इन ऑवर स्टार्स’– Article

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‘द फॉल्ट इन ऑवर स्टार्स’ की शुरुआत फिल्म की लीडिंग लेडी शेलेन वूडली के वाइस ओवर के साथ होती है। जिसमें वो हमें बताती हैं कि ये कोई टिपिकल मेलोड्रामा नहीं है

राजीव मसंद

राजीव मसंद

Updated: July 5, 2014, 7:44 AM IST

मुंबई। ‘द फॉल्ट इन ऑवर स्टार्स’ की शुरुआत फिल्म की लीडिंग लेडी शेलेन वूडली के वाइस ओवर के साथ होती है। जिसमें वो हमें बताती हैं कि ये कोई टिपिकल मेलोड्रामा नहीं है जिसमें इनकी कहानी को ना ही सुगरकोट किया गया है और ना ही आपके दिल को पिघलाने वाले म्यूजिक का इस्तेमाल किया गया है। फिल्म ज्यादातर हिस्सों में इस वादे को पूरा करती है और अपने नायक के जीवन की कड़वी सच्चाई को दर्शाने के लिए ह्यूमर का इस्तेमाल करती है। ये फिल्म अंत तक आपको भावनाओं नें इतना डूबा देगी कि आप अपने आंसू नहीं रोक पाएंगे।

हेजल के किरदार में वूडली एक 16 साल की डिप्रेस्ड टीनेजर हैं जिसे कैंसर की बीमारी है। और जिसे अपनी नाक में ट्यूब लगाने पड़ते हैं और ऑक्सीजन टैंक हमेशा अपने साथ रखना है। जब उसकी मां उसे जबरजस्ती कैंसर सपोर्टिंग ग्रुप में भेजती तो वहां हेजल की मुलाकात होती है एक 18 साल के चार्मिंग लड़के वॉटर से जो कैंसर से अपनी एक टांग खो चुका है। फिर भी वो हेजल का दिल जीतने में कामयाब हो जाता है।

जॉन ग्रीन की बेस्टसेलिंग नॉवेल पर आधारित ये फिल्म काम करती है क्योंकि वूडली और एलगॉर्ट असली टीनेजर की तरह दिखते हैं और बात करते हैं। स्मार्ट, गुस्सैल, फनी, प्यार में पागल और कभी-कभी कड़वी फिल्म के दोनों नायक लगातार सच्चे दिखते हैं। मैं इस फिल्म को 5 में से 3 स्टार देता हूं


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