गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी कहे तो अवार्ड का पैसा वापस कर दूंगा: कुलदीप नैयर

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शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने वरिष्ठ लेखक और पत्रकार कुलदीप नैयर से सम्मान वापस लेने का फैसला किया है. अकाल तख़्त की 400वीं वर्षगांठ पर पत्रकारिता में उनके योगदान के लिए सम्मान दिया था.

सवाल – एसजीपीसी ने आपसे अवार्ड वापस लेने की बात कही है, ये पूरी कॉन्ट्रोवर्सी क्या है?

जवाब- कॉन्ट्रोवर्सी तो मुझे याद नहीं है लेकिन यही है कि मैं किसी बात पर कह रहा था कि ये आदमी भी भिंडरावाले होने की कोशिश कर रहा है, ये जो राम रहीम है, बस इतनी बात हुई, और तो कोई बात ही नहीं हुई.

सवाल- कुछ अख़बारों में छपा है, बयान भी दिया है.

जवाब – मैंने अभी वो बयान नहीं देखा है, लेकिन अगर उन्होंने कहा है और अगर ये ऑफ़िशियली प्रूव हो गया या वो मुझे लिखें, तो उनके अवार्ड के पैसे मैं वापस कर दूंगा.

सवाल – ये कौन सा अवार्ड था, किस तरह का अवार्ड था, किस चीज़ के लिए दिया गया था?

जवाब – शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने दिया था बहुत साल पहले कि इस आदमी ने बहुत मदद की पंजाबी प्रांत बनाने में. पंजाबी प्रांत के लिए मैं लिखता रहा हूं कि अगर सब ज़बानों को प्रांत मिला है तो पंजाबियों को भी मिलना चाहिए लेकिन अब तो कोई बात नहीं हुई आपस में कि कुछ पता चले. जब मैं गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी गया था, तो मुझे याद है कि तोहरा साहब जिंदा और उन्होंने कुछ अवार्ड भी दिया था, वही एसजीपीसी के चेयरमेन भी थे उस समय.

एसजीपीसी ने कुलदीप नैयर से वापस लिया सम्मान

दरबार साहब के लिए दिमाग में बहुत रुतबा है.

सवाल- आपको नहीं लगता कि आपके जैसे आदमी के लिए ये अवार्ड छोटा ही था, उसको लेने पर ही कई लोग सवाल उठा सकते हैं?

जवाब- हां ये सवाल बहुत लोगों ने किया था लेकिन मैंने कहा कि क्योंकि ये दरबार साहब, हरमिंदर साहब से आ रहा है मैं लूंगा, क्योंकि मेरे दिमाग में उनका बहुत रुतबा है.

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सवाल- कुछ लोग ये भी कहते हैं कि एसजीपीसी एक ज़माने में प्रोग्रोसिव संस्था थी, उसके बनने के पीछे भी एक इतिहास है, अब अचानक से संत भिंडरावाले के बारे में कुछ कहा जाए या उनसे जुड़ा कोई बयान हो तो उसपर इतनी प्रतिक्रिया होना ठीक है. क्या कोई सवाल ही नहीं उठा सकता किसी पर?

जवाब- ये एसजीपीसी दो हिस्सों में बंटी थी, एक वो लोग जो भिंडरावाले के साथ थे और दूसरे वो जो लोंगोवाल के साथ थे, लोंगोवाल को समझा जाता था कि ये सही और शांत आदमी है.

जैसे जब ये एजिटेशन हो रहा था तो मैं अमृतसर गया, मैं लोंगोवाल साहब से मिला था तो उन्होंने कहा था कि चंबल की हवेली हो आए? मैंने कहा नहीं. भिंडरावाले लार्जर दैन लाइफ हो गया था क्योंकि वो बातें बहुत सख्त करता था, हिंदुओं के खिलाफ करता था, उससे उसकी एक इमेज बन गई.

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी का क्या कहना है?

ये फैसला शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी की मीटिंग में लिया गया था. एसजीपीसी के अध्यक्ष कृपाल सिंह बडूंगर ने बयान में कहा था, “कुलदीप नैयर ने जिस तरह की शब्दावली इस्तेमाल की थी, उसके बाद सिख समुदाय में नाराज़गी देखी जा रही थी. इसीलिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने उन्हें दिया गया अवॉर्ड वापस लिया है.”

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